शनिवार, 13 दिसंबर 2014


 !!  " भूतलीला " ,,,!!

    ( मंच पहले सूना रहता है !  फिर एक व्यक्ति का प्रवेश )

    व्यक्ति :- ( स्वतः ) ,,, ' हमेशा भाग्य ,, भाग्य ,,!! कितना भी काम करो ,, सफलता नहीं मिलाती ! और कुछ हैं की बिना कुछ किये ही चढ़ गए सफलता के सिंहासन पर ,,,!   न जाने क्या सोच कर मेरे पिता ने मेरा नाम रखा था - " गौरव सिंह " ,,! ,,,किस बात का गौरव ,,??  किस काम का गौरव ,,,?? ,, अब तो खुद पर ही तरस आने लगा है --- जाने कब होगा  ,,  कैसे होगा ,  मेरा उद्धार ,,,!!

     ( मंच पर रंगीन प्रकाश का आवागमन )

      ( तभी एक दूसरा व्यक्ति  विचित्र वेशभूषा में मंच पर आता है !  यह व्यक्ति अधेड़ है ,, तथा ' तांत्रिकों ' की तरह पोशाक धारण किये है ! हाथ में एक ' गठरी ' है ,,, और तरह तरह के सामान , ,, मालाएं ,, आदि कंधे पर लादे हैं ,,! )

  तांत्रिक :- ' कहो गौरव सिंह  ,,!! ,, क्योँ  बड़बड़ा रहे हो ,,?? "

  गौरव सिंह :-         ' ( चौंक कर उसे घूरते हुए ) ,,, तुम ,,?? कौन हो तुम ,,??  और तुम्हे कैसे मालूम की मेरा नाम गौरव सिंह है ,,? "

 तांत्रिक:- ( हँसते हुए ) ,, ' त्रिलोकीनाथ ' से क्या छिप  सका     है  गौरव  सिंह ,,? ,,, त्रिलोकी नाथ          
                                क्या   नहीं  जानता ,       ,??

  गौरव सिंह :-       ( संदेह से  तांत्रिक  को घूरते हुए ) ।'
   ,,  "                , त्रिलोकीनाथ  ,,??,,, क्या मतलब ,,,??  "

   त्रिलोकीनाथ  :- " त्रिलोकीनाथ का मतलब नहीं जानते ,
                        ' गौरव सिंह ' ,,??   कैसे मूर्ख बुद्धिजीवी हो,,
                         तुम ,,??

   गौरव सिंह ;-  " त्रिलोकीनाथ ' का मतलब में खूब जानता हूँ ,
                      तीनो लोकों का स्वामी ' ,, लेकिन तुम  वह
                     त्रिलोकीनाथ  तो हो नहीं ,,!! "
   त्रिलोकीनाथ ;- ' मेने कब कहा की में वह त्रिलोकीनाथ  हूँ ,,!
                        जैसे तुम गौरव सिंह होकर भी वह गौरव सिंह
                      नहीं ,,, उसी प्रकार  में त्रिलोकीनाथ होकर भी
                      वह त्रिलोकीनाथ नहीं हूँ ,,! "  
  गौरव सिंह ;- " ( उपेक्षा से  कंधे उचकाते हुए  ) ,,, होगा ,,!!
                     ,,,इससे मुझे क्या ,,?? ,,, (रूककर घूरते हुए )
                     … क्यों मेरे पीछे पड़े हो ,,??   कोई और
                      शिकार ढूंढो ,,!!
  त्रिलोकीनाथ ;- ( किंचित क्रोध में ) ,, मैं कोई शिकारी नहीं
                     मूर्ख ,,!!  मैं त्रिलोकी नाथ हूँ ,,!! '
  गौरव सिंह ;- ' तो बने रहो ,,त्रिलोकीनाथ ,,!  लेकिन मेरा
                      पिंड छोडो ,,!  मैं इस समय बहुत डिस्टर्ब  हूँ '
  त्रिलोकीनाथ ;- ( मुस्कराते हुए ) ,, मुझे डिस्टर्ब लोग बहुत
                     अच्छे लगते हैं ,, ! मैं डिसटर्ब लोगों के ही काम
                     आता हूँ ,,!
  गौरव सिंह ;- ( सर हिलाते हुए ) ,,  अच्छा ,,?? ,, तो बताओ
                     क्या कर सकते हो तुम मेरे लिए ,,??
   त्रिलोकीनाथ  ;-  ( गठरी नीचे रखते हुए ),, पहले तुम अपनी
                          जेब में बची वह आखरी सिगरेट  मुझे
                        पिलाओ   ,, जो तुमने  अपने दोस्त के  '
                       पैकेट ' से चुराई है ,,!!
  गौरव सिंह :- ' ( चौंक कर ) ,,' सिगरेट ,,?? ,,( स्वतः  )
                    ,,,इसे कैसे मालूमम की मेरी जेब में  एक '
                      सिगरेट ' है ,,??   ( प्रकट में ) ,,
                     ' सिगरेट  मैं तुम्हें दे दूंगा ,तो फिर मैं क्या
                     ,पियूँगा ,,??  मेरे  पास बस एक यही सिगरेट
                      बची है ,,! "
त्रिलोकीनाथ ;- " बच्चा ,,! " ,, त्रिलोकीनाथ  की  कृपा  होगी
                     तो  सिगरेट कंपनी का ' मालिक ' बन जाएगा
                     ,,, तूँ,,  समझा ,,??
 गौरव सिंह ;- ( घूरते हुए ) ,,, बहुत खूब ,,!!,,, अब तुम से ' तूँ '
                   पर उतर  आये,,,त्रिलोकीनाथ ,,? ,, ( रुक कर ),,
                   मुझे  बेवकूफ बनाने की कोशिश मत  करो ,,,
                   " और चलते बनो यहां से ,,, समझे ,,? '

गुरुवार, 6 मार्च 2014

  भारत  के स्वप्नलोक  की तीन   ' झूठी सुखद ' कथाएं ::::::*****

   एक ----,

    गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेंद्र मोदी  ने सचिव को चेमबर में बुलाया  और पूछा-
 
     ' आमआदमी पार्टी के प्रमुख और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री  श्री केजरीवाल का   गुजरात के विकास को आकलन करने का प्रोग्राम है ,,, आपने क्या प्रबंध करवाये हैं ,,?? "

   ' जी वो विरोधी पार्टी के व्यक्ति हैं , हमने  उनकी सुरक्षा और निगरानी के प्रबंध कर दिए हैं "

    " --   मैं उंसकी व्यक्तिगत रूप  से आगवानी करना चाहूँगा --  उन्हें सूचित करो , और वहाँ जाने कि व्यवस्था करो ,,! "

     "… लेकिन ,,," -   सचिव ने कुछ झिझकते हुए कहना चाहा !

      ' लेकिन वेकिन कुछ नहीं ,  मीडिया  को भी खबर करो , वे वहाँ मौजूद रहे ! " --- मोदी ने गम्भीर स्वर में कहा !

    कुछ देर बाद मोदी  एक काफिले के साथ उस रेस्ट हाउस में पहुंचे ! मीडिया मुस्कराते हुए बाहर ही खड़ा था !  उसने प्रश्न दागा -- " क्या केजरीवाल से भी सरकार बनाने में  सपोर्ट लेंगे ? "

   मोदी मुस्कराये !  बोले--
----"  यह उन पर निर्भर है ! मैं तो गुजरात के एक अतिथि के स्वागत के लिए आया हूँ  जो विकास के मॉडल का आकलन करना चाहते हैं !  हम लोग जो भी  बात करेंगे वह देश से छिपी ना हो इसलिये आप भी अंदर आमंत्रित है !"

   सब लोग अंदर गए ! केजरीवाल ने अपने सभी सहयोगियों सहित उठकर मोदी को नमस्कार किया ! मोदी ने नमस्कार करते हुए कहा __

     " आप को गुजरात आने में कोई असुविधा तो नहीं हुई ? "   आप जहाँ चाहे जाकर देख सकते हैं ! कहें तो हम एक सचिव आपके साथ करदें ? "

   ''' केजरीवाल बोले -- ' मोदी जी हम  अपनी नजर से  आपके उन दावो के सत्यापित करना चाहते हैं  जो आप देशवासियों के बीच कर रहे हैं ,,,, देखना चाहते हैं कि वे कितने खरे हैं ,,  इसिलए अकेले ही घूमना चाहेंगे  , लोगों से भी मिलेंगे ! !  आप तो जानते ही हैं कि हमारी प्राथमिकता  ' व्यवस्था परिवर्तन ' की है , हम विकास से पहले आम आदमी के हित में वह व्यवस्था लाना चाहते हैं , जो भ्रस्टाचार मुक्त हो ! "

 मोदी मुस्कराये  और बोले -- " जरुर ,,! " हमारा आपका विरोध सिर्फ ' पद्धति ' को लेकर है ! लेकिन लक्ष्य  तो एक ही है - " रास्ट्र सेवा " ! -- आप बेखौफ गुजरात घूमें , जितने बड़े काफिले के साथ जाना चाहें जाएँ ,  जनता से पूछें !  लेकिन एक कृपा जरुर करें ,,! "

   '   क्या " ,,? केजरीवाल ने पूछा !

     --- " विकास से अगर आप संतुष्ट हों तो सबको बताएं , किन्तु अगर कोई कमी हो तो पहले हमें बताएं ताकि हम उस कमी को दूर करने का प्रयास करें !  आप तो जानते ही हैं कि हर बात कोई भी पूरी नहीं करपाता है , अधूरी बातें अगर ' आकलन कर्ता ' से मालुम होती रहें तो काम करने वाले को काफी मदद मिलती है ! "--- कह कर मोदी नमस्कार करके बाहर आने लगे तो मीडिया वाले रुआंसे होकर बोले --

 " ,,,  यह खबर नहीं बना सकते हम लोग !  ,,,,!!'




   दो ,,,,**

    दोपहर के बारह बजने वाले थे !    इन्स्पेक्टर  मानदास  सजग थे और  थाने में बार बार पहलू बदल रहे थे  !

    कारण था  गुजरात में  ' केजरीवाल ' का काफिला उनके क्षेत्र से गुजरने वाला था ,, काफिला बड़ा था , लोग नारे भी लगा रहे थे , ,,, दूसरी और खबर आने वाली थी कि ' आचार संहिता '  तुरंत लगने वाली है !

   सब इन्स्पेक्टर  गिरीश शाह बोला -  " सर क्या यह आचार संहिता  कल  सुबह  पांच बजे से लागू नहीं की जा सकती , ताकि पॉलिटिकल पार्टियां  सुबह से ही उसके अनुसार अपने प्रोग्राम  बनाने  लगें   और कोई गलती के चांस ही ना रहें ? "

   मानदास ने पुलिश वाला सधा सधाया  फ़िल्मी जबाब दिया -- " गिरीश ,,!   हम कानून बनाने वाले नहीं , बल्कि कानून पालन करने वाले लोग हैं ! "

   --- यस सर ,,,! " गिरीश को  अपनी गलती समझ में आगयी !

   - तभी फोन घनघनाया ! दूसरी और से एस पी  पुलिश ने मान दास से कहा -

      ' मानदास ,,,!,, आचार संहिता लागू हो गयी !  केजरीवाल का काफिला हरिभाई चोक के पास से गुजर रहा है ,,, तुम उनसे मिलकर उन्हें बताओ कि अब वे दस से ज्यादा गाड़ियां अपने काफिले में नहीं रख सकते !   ट्रेफिक बाधित हो ऐसा भी नहीं कर सकते , नारों में व्यक्तिगत आरोप नहीं लगा सकते ! … हॄाप   जल्दी करो ,,, मीडिया वहाँ पहुँच ही चुका है ,,, कहीं हम पर दोष ना मढ़ने लगे कि  हैम आचार संहिता लागू करने में लापरवाह रहे ! "

    ,,," सर।! "... मानदास  ने उठकर एड़ियाँ बजाते हुए कहा   और फोन बंद कर  बोला - " गिरीश चलो ,,, हरिभाई चोक ",,! ! "

     आननफानन में पुलिस का दस्ता हरिभाई चोक पर - ' केजरीवाल ' के सामने खड़ा हो गया !

     ,,, " क्या है भाई ,,?  "---केजरीवाल ने पूछा !

        ' सर ' अभी अभी  अचार संहिता लागू होगयी ! -- आप अपनी गाड़ियों की संख्या घटा दे ! दस गाड़ियों के अलावा बाकी को  चाहें तो हमारी चोकी पर खड़ी करवा दें ! हम उन्हें सुरक्षित रखेंगे ! "

    केजरीवाल ने थोड़ी देर मौन हो कर , मानदास कि   बर्दी पर   लगे नेम प्लेट को पढते हुए कहा --  " धन्यवाद ,,, इन्स्पेक्टर मानदास जी  !   आपमें हमें  सचेत कर दिया ,  हम अपनी ज्यादा गाड़ियों को कम करवा कर वापिस भेज देते हैं !  चोकी पर इसलिए ना भेजेंगे क्यूंकि  कार्यकर्ताओं , मीडिया , और जनता में  गलत सन्देश जा सकता है कि काफिले को  पुलिस वालों ने रोक कर गाड़ियां जब्त कर ली ! "

    " ठीक है सर ,,! ' -- मानदास मुस्करा कर बोला !  -" - आप पानी पियेंगे ? बहुत देर से निकले हैं - पानी कि बोतल और पाउच मंगवा देता हूँ ! "

   ---" नहीं मानदास जी ! "  सरकारी खर्च पर हम अपनी ' रेली नहीं ' निकालेंगे चाहे फिर वह पानी ही क्यों ना हो ,,! "

   "  ....   सर... आप चिंता ना करें ,,,!  पानी में अपनी तनख्वाह से पिलाऊँगा ! ,,, यह गुजरात है ,,, यहाँ हम अतिथि को देवता तुल्य मानते हैं ! "

       केजरीवाल भी मुस्कराये !  बोले - ' आपका प्रेम ही हमारा आतिथ्य है ! "  हम इसे याद रखेंगे !

        इन्स्पेक्टर ने सेल्यूट किया काफिला आगे  बढ़ा ! केजरीवाल ने माइक पर सभी अनुगामियों को सम्बोधित किया -- " भाइयो ! आचार संहिता के अनुसार दस गाड़ियों से पी छे वाली गाड़ियां वापिस हो जाएँ और लोग भी पैदल हो जाएँ ! मैं भी अब पैदल ही चलूँगा ! "

    मीडिया वालों ने अपन कैमरों पर ' केप ' लगाते   हुए कहा _  "  कोई खबर  नहीं बन रही ,,, अब तो ये केमरे भी बोझ लग रहे हैं !


तीन*******

   ऋषभ को  मोबाइल पर सन्देश मिला --

    पार्टी कार्यालय पहुँचो !

     ऋषभ आम आदमी पार्टी का सक्रीय कार्य कर्ता था ! उसने तुरंत मेट्रो पकड़ी और चाँदनी चोक पहुंचा !  वहाँ  उसके कई कार्य कर्ता  मित्र खड़े थे !   उसने रघु से पूछा - ' क्या हुआ ? "

   रघु बोला -- " गुजरात में केजरीवाल को रोका जा रहा है ,,, हमें भाजपा  कार्यालय जा कर उन्हें प्रतिवेदन देना  होगा  कि वहाँ ऐसा ना किया जाये , क्यूंकि वहाँ भाजपा कि सरकार है ! "

   ''' क्या यह प्रतिवेदन कोई एक दो आदमी जा कर नहीं दे सकते ? "

     "  शायद वे लोग उसे प्रभावशाली  ना माने  ! समूह में जायेंगे तो उन्हें सुनना और मानना ही पडेगा ! "

         कुछ देर बाद ही शांतिमार्च करता हुआ आम आदमी पार्टी का एक समूह भाज पा कार्यालय के सामने आ खड़ा हुआ !  ऋषभ को पता ही नहीं चला कि मीडिया वाले कब उनके साथ आकर जुड़ गए और वहाँ पहुँच गए !

    कार्यालय के सामने जा कर  उन्होंने  माइक पर प्रतिवेदन पढ़ा और भाजपा से अनुरोध किया कि वे मामले को सुलझाएं !

      थोड़ी ही देर में भाजपा कार्यालय का गेट खुला , और भाजपा के पांच प्रतिनिधि हाथ में फूलों का गुलदस्ता लिए हुए बाहर आये !  उन्होंने आम आदमी पार्टी वालों से प्रतिवेदन लिया  और बदले में उन्हें गुलदस्ता देकर माइक पर ही घोषणा कि कि वे हर सम्भव   तुरंत  यह प्रयास करेंगे कि केजरीवाल जी का काफिला कही ना रुके    वा  ! उन पर कोई हमला     ना कर सके     !   आखिर वह उनके  ' प्रिय नेता " मोदीजी " का प्रदेश है ! जहाँ गांधी , सरदार पटेल , बिनोबा जैसे लोग पैदा हुए हैं ! वहाँ अतिथि का आदर दिल से होता है ! "

    आ, आदमी पार्टी कार्यकर्ता हाथ मिला कर वापिस लौट आये !


****************

    रात में बी बी सी लन्दन पर खबर आ रही थी ---- ' भारत में चुनाव हो रहे हैं , कई देशों के लोग वहाँ जा कर चुनाव देख रहे हैं !  ख़ास बात यह है कि -- भारत गांधी का देश है ! "

---- सभाजीत

  (   यह रचना उस समय की है  जब   2014  में लोकसभा के  के चुनाव हो रहे थे ,,  और मोदीजी प्रधान मंत्री नहीं थे  ) )
  भारत  के स्वप्नलोक  की तीन   ' झूठी सुखद ' कथाएं ::::::***** 

   एक ----,

    गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेंद्र मोदी  ने सचिव को चेमबर में बुलाया  और पूछा-
 
     ' आमआदमी पार्टी के प्रमुख और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री  श्री केजरीवाल का   गुजरात के विकास को आकलन करने का प्रोग्राम है ,,, आपने क्या प्रबंध करवाये हैं ,,?? "

   ' जी वो विरोधी पार्टी के व्यक्ति हैं , हमने  उनकी सुरक्षा और निगरानी के प्रबंध कर दिए हैं "

    " --   मैं उंसकी व्यक्तिगत रूप  से आगवानी करना चाहूँगा --  उन्हें सूचित करो , और वहाँ जाने कि व्यवस्था करो ,,! "

     "… लेकिन ,,," -   सचिव ने कुछ झिझकते हुए कहना चाहा !

      ' लेकिन वेकिन कुछ नहीं ,  मीडिया  को भी खबर करो , वे वहाँ मौजूद रहे ! " --- मोदी ने गम्भीर स्वर में कहा !

    कुछ देर बाद मोदी  एक काफिले के साथ उस रेस्ट हाउस में पहुंचे ! मीडिया मुस्कराते हुए बाहर ही खड़ा था !  उसने प्रश्न दागा -- " क्या केजरीवाल से भी सरकार बनाने में  सपोर्ट लेंगे ? "

   मोदी मुस्कराये !  बोले--
----"  यह उन पर निर्भर है ! मैं तो गुजरात के एक अतिथि के स्वागत के लिए आया हूँ  जो विकास के मॉडल का आकलन करना चाहते हैं !  हम लोग जो भी  बात करेंगे वह देश से छिपी ना हो इसलिये आप भी अंदर आमंत्रित है !"

   सब लोग अंदर गए ! केजरीवाल ने अपने सभी सहयोगियों सहित उठकर मोदी को नमस्कार किया ! मोदी ने नमस्कार करते हुए कहा __

     " आप को गुजरात आने में कोई असुविधा तो नहीं हुई ? "   आप जहाँ चाहे जाकर देख सकते हैं ! कहें तो हम एक सचिव आपके साथ करदें ? "

   ''' केजरीवाल बोले -- ' मोदी जी हम  अपनी नजर से  आपके उन दावो के सत्यापित करना चाहते हैं  जो आप देशवासियों के बीच कर रहे हैं ,,,, देखना चाहते हैं कि वे कितने खरे हैं ,,  इसिलए अकेले ही घूमना चाहेंगे  , लोगों से भी मिलेंगे ! !  आप तो जानते ही हैं कि हमारी प्राथमिकता  ' व्यवस्था परिवर्तन ' की है , हम विकास से पहले आम आदमी के हित में वह व्यवस्था लाना चाहते हैं , जो भ्रस्टाचार मुक्त हो ! "

 मोदी मुस्कराये  और बोले -- " जरुर ,,! " हमारा आपका विरोध सिर्फ ' पद्धति ' को लेकर है ! लेकिन लक्ष्य  तो एक ही है - " रास्ट्र सेवा " ! -- आप बेखौफ गुजरात घूमें , जितने बड़े काफिले के साथ जाना चाहें जाएँ ,  जनता से पूछें !  लेकिन एक कृपा जरुर करें ,,! "

   '   क्या " ,,? केजरीवाल ने पूछा !

     --- " विकास से अगर आप संतुष्ट हों तो सबको बताएं , किन्तु अगर कोई कमी हो तो पहले हमें बताएं ताकि हम उस कमी को दूर करने का प्रयास करें !  आप तो जानते ही हैं कि हर बात कोई भी पूरी नहीं करपाता है , अधूरी बातें अगर ' आकलन कर्ता ' से मालुम होती रहें तो काम करने वाले को काफी मदद मिलती है ! "--- कह कर मोदी नमस्कार करके बाहर आने लगे तो मीडिया वाले रुआंसे होकर बोले --

 " ,,,  यह खबर नहीं बना सकते हम लोग !  ,,,,!!'



   दो ,,,,**

    दोपहर के बारह बजने वाले थे !    इन्स्पेक्टर  मानदास  सजग थे और  थाने में बार बार पहलू बदल रहे थे  !

    कारण था  गुजरात में  ' केजरीवाल ' का काफिला उनके क्षेत्र से गुजरने वाला था ,, काफिला बड़ा था , लोग नारे भी लगा रहे थे , ,,, दूसरी और खबर आने वाली थी कि ' आचार संहिता '  तुरंत लगने वाली है !

   सब इन्स्पेक्टर  गिरीश शाह बोला -  " सर क्या यह आचार संहिता  कल  सुबह  पांच बजे से लागू नहीं की जा सकती , ताकि पॉलिटिकल पार्टियां  सुबह से ही उसके अनुसार अपने प्रोग्राम  बनाने  लगें   और कोई गलती के चांस ही ना रहें ? "

   मानदास ने पुलिश वाला सधा सधाया  फ़िल्मी जबाब दिया -- " गिरीश ,,!   हम कानून बनाने वाले नहीं , बल्कि कानून पालन करने वाले लोग हैं ! "

   --- यस सर ,,,! " गिरीश को  अपनी गलती समझ में आगयी !

   - तभी फोन घनघनाया ! दूसरी और से एस पी  पुलिश ने मान दास से कहा -

      ' मानदास ,,,!,, आचार संहिता लागू हो गयी !  केजरीवाल का काफिला हरिभाई चोक के पास से गुजर रहा है ,,, तुम उनसे मिलकर उन्हें बताओ कि अब वे दस से ज्यादा गाड़ियां अपने काफिले में नहीं रख सकते !   ट्रेफिक बाधित हो ऐसा भी नहीं कर सकते , नारों में व्यक्तिगत आरोप नहीं लगा सकते ! … हॄाप   जल्दी करो ,,, मीडिया वहाँ पहुँच ही चुका है ,,, कहीं हम पर दोष ना मढ़ने लगे कि  हैम आचार संहिता लागू करने में लापरवाह रहे ! "

    ,,," सर।! "... मानदास  ने उठकर एड़ियाँ बजाते हुए कहा   और फोन बंद कर  बोला - " गिरीश चलो ,,, हरिभाई चोक ",,! ! "

     आननफानन में पुलिस का दस्ता हरिभाई चोक पर - ' केजरीवाल ' के सामने खड़ा हो गया !

     ,,, " क्या है भाई ,,?  "---केजरीवाल ने पूछा !

        ' सर ' अभी अभी  अचार संहिता लागू होगयी ! -- आप अपनी गाड़ियों की संख्या घटा दे ! दस गाड़ियों के अलावा बाकी को  चाहें तो हमारी चोकी पर खड़ी करवा दें ! हम उन्हें सुरक्षित रखेंगे ! "

    केजरीवाल ने थोड़ी देर मौन हो कर , मानदास कि   बर्दी पर   लगे नेम प्लेट को पढते हुए कहा --  " धन्यवाद ,,, इन्स्पेक्टर मानदास जी  !   आपमें हमें  सचेत कर दिया ,  हम अपनी ज्यादा गाड़ियों को कम करवा कर वापिस भेज देते हैं !  चोकी पर इसलिए ना भेजेंगे क्यूंकि  कार्यकर्ताओं , मीडिया , और जनता में  गलत सन्देश जा सकता है कि काफिले को  पुलिस वालों ने रोक कर गाड़ियां जब्त कर ली ! "

    " ठीक है सर ,,! ' -- मानदास मुस्करा कर बोला !  -" - आप पानी पियेंगे ? बहुत देर से निकले हैं - पानी कि बोतल और पाउच मंगवा देता हूँ ! "

   ---" नहीं मानदास जी ! "  सरकारी खर्च पर हम अपनी ' रेली नहीं ' निकालेंगे चाहे फिर वह पानी ही क्यों ना हो ,,! "

   "  ....   सर... आप चिंता ना करें ,,,!  पानी में अपनी तनख्वाह से पिलाऊँगा ! ,,, यह गुजरात है ,,, यहाँ हम अतिथि को देवता तुल्य मानते हैं ! "

       केजरीवाल भी मुस्कराये !  बोले - ' आपका प्रेम ही हमारा आतिथ्य है ! "  हम इसे याद रखेंगे !

        इन्स्पेक्टर ने सेल्यूट किया काफिला आगे  बढ़ा ! केजरीवाल ने माइक पर सभी अनुगामियों को सम्बोधित किया -- " भाइयो ! आचार संहिता के अनुसार दस गाड़ियों से पी छे वाली गाड़ियां वापिस हो जाएँ और लोग भी पैदल हो जाएँ ! मैं भी अब पैदल ही चलूँगा ! "

    मीडिया वालों ने अपन कैमरों पर ' केप ' लगाते   हुए कहा _  "  कोई खबर  नहीं बन रही ,,, अब तो ये केमरे भी बोझ लग रहे हैं !

तीन*******

   ऋषभ को  मोबाइल पर सन्देश मिला --

    पार्टी कार्यालय पहुँचो !  

     ऋषभ आम आदमी पार्टी का सक्रीय कार्य कर्ता था ! उसने तुरंत मेट्रो पकड़ी और चाँदनी चोक पहुंचा !  वहाँ  उसके कई कार्य कर्ता  मित्र खड़े थे !   उसने रघु से पूछा - ' क्या हुआ ? "

   रघु बोला -- " गुजरात में केजरीवाल को रोका जा रहा है ,,, हमें भाजपा  कार्यालय जा कर उन्हें प्रतिवेदन देना  होगा  कि वहाँ ऐसा ना किया जाये , क्यूंकि वहाँ भाजपा कि सरकार है ! "

   ''' क्या यह प्रतिवेदन कोई एक दो आदमी जा कर नहीं दे सकते ? "

     "  शायद वे लोग उसे प्रभावशाली  ना माने  ! समूह में जायेंगे तो उन्हें सुनना और मानना ही पडेगा ! "

         कुछ देर बाद ही शांतिमार्च करता हुआ आम आदमी पार्टी का एक समूह भाज पा कार्यालय के सामने आ खड़ा हुआ !  ऋषभ को पता ही नहीं चला कि मीडिया वाले कब उनके साथ आकर जुड़ गए और वहाँ पहुँच गए !

    कार्यालय के सामने जा कर  उन्होंने  माइक पर प्रतिवेदन पढ़ा और भाजपा से अनुरोध किया कि वे मामले को सुलझाएं !
 
      थोड़ी ही देर में भाजपा कार्यालय का गेट खुला , और भाजपा के पांच प्रतिनिधि हाथ में फूलों का गुलदस्ता लिए हुए बाहर आये !  उन्होंने आम आदमी पार्टी वालों से प्रतिवेदन लिया  और बदले में उन्हें गुलदस्ता देकर माइक पर ही घोषणा कि कि वे हर सम्भव   तुरंत  यह प्रयास करेंगे कि केजरीवाल जी का काफिला कही ना रुके    वा  ! उन पर कोई हमला     ना कर सके     !   आखिर वह उनके  ' प्रिय नेता " मोदीजी " का प्रदेश है ! जहाँ गांधी , सरदार पटेल , बिनोबा जैसे लोग पैदा हुए हैं ! वहाँ अतिथि का आदर दिल से होता है ! "

    आ, आदमी पार्टी कार्यकर्ता हाथ मिला कर वापिस लौट आये !


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    रात में बी बी सी लन्दन पर खबर आ रही थी ---- ' भारत में चुनाव हो रहे हैं , कई देशों के लोग वहाँ जा कर चुनाव देख रहे हैं !  ख़ास बात यह है कि -- भारत गांधी का देश है ! "




सोमवार, 10 फ़रवरी 2014

कठोरता का प्रतीक चिन्ह ,,,
' पाषाण ' होता है ,,' पुरुष ',,!
और स्त्री होती है , ,,,,
' प्यार ' की एक 'छैनी ',,,!!

हर छैनी ,, 
काटती है , छांटती है , तोड़ती है , एक 'पाषाण ' को ,
जीवन भर , ,,,,
और गढ़ देती है उसे ,
एक ' आकार ' में ,,,!!

कुछ बनाती हैं ,,आकर्षक मूर्तियां ,
कुछ अनगढ़ ,,, बेडौल,, आकृतियां ,,,!!
और कुछ ' छार छार कर देती है उसे तोड़ते,,तोड़ते ,,!!

हर हालत में अस्तित्व खो देता है पाषाण ,,
अपने ' मूल- रूप ' को खोकर ,,!

किन्तु छैनी रहती है,,,
सदा अस्तित्व में ,
अपनी शाश्वत ' धार ' के साथ,,,!!

--- सभाजीत