शुक्रवार, 5 जुलाई 2013

patni

' छद्म पुराण '   में वर्णित एक महा कथा ..,

ब्रम्हा जी ने पहले ' पुरुष '  ( नर ) बनाया ...,उसे असीम बल  सोंप दिया , शीघ्र ही ब्रम्हाजी को अपनी भूल का अहसास हुआ की इस असीम बलशाली के निरंकुश होने पर  इसका विनाश कैसे होगा ?  तब उन्होंने उससे भी ज्यादा बलशाली अस्त्र बनाया ---" ब्रम्हास्त्र " .., जिससे बचना किसी के बस में नहीं था !!
लेकिन जब ब्रम्हास्त्र से सारी  प्रकृति और जीव जंतु भी भस्म होने लगे तो उन्हें फिर अपनी भूल का अहसास हुआ ...की वस्तुतः यह अस्त्र तो " नर" - संहार के  प्रयोजन भर के लिए ही  बनाया था..इससे तो पूरी श्रष्टि के ही विनाश का डर पैदा हो गया  है !

तब उन्होंने ' नर ' पर अंकुश रखने और उसका संहार करने , उसी ब्रम्हाश्त्र का दूसरा  वर्ज़न बनाया जिसे आज हम  ' स्त्री ' के नाम से जानते हैं ! ...,
 
इस ' ब्रम्हास्त्र का कोई जबाब नहीं .., इसकी पूजा करके , इसे ' नमन ' करके ही  इससे बचा जा सकता है "